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धर्मनिरपेक्षता हमारा धर्म आखिर कैसे ?

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धर्मनिरपेक्षता को समझाने के लिए हमारे योग्य नेतृत्व ने हमारे सामने बखूबी उदाहरण पेश किए...और जिसे भारत ने अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाया, हमने भी उसे उसी उदात्त रुप में लिया...जहां पंडित जी ने इसका मतलब सभी धर्मों के प्रति तटस्थता के रूप में हमारे सामने रखा, गांधी जी ने उसी को धर्मों के प्रति धार्मिक समभाव के रूप में हमारे सामने रखा और डॉक्टर राधाकृष्णन ने उसी की परिभाषा को और व्यापक आयाम देकर हमारे सामने जिस रूप में रखा, उसने हमारा सोचने का दायरा आसमान की तरह व्यापक बना दिया... आज उसी विचार को एक ऐसा युवा नेतृत्व सभी को जोड़ने की बात कहकर बड़ी सहजता से सभी को साथ लेकर चलने का साहसिक प्रयास कर रहा है...क्या हमें उस सोच को आगे बढ़ाने के लिए सागर में बूंद का प्रयास नहीं करना चाहिए... मैं और आप मिलकर बनेंगे हम...बस इस सूत्र को हमें किसी तरह उलझने से बचाना है और इसकी चमक को चांदी की धार की तरह चमकाना है... हमें ऐसा ही नेतृत्व चाहिए जो जटिल ना होकर सहृदय और सभी को साथ लेकर चलने वाला हो...जिससे बात करने में किसी को आतंकित न होना पड़े...आपको अपनी बात कहने के लिए पूरा खुला वातावरण मिल जा…

गैलिलियो _________________________________________जिसने बदल दी दुनिया, तोड़ दिए भ्रम

गैलिलियो _________________________________________जिसने बदल दी दुनिया, तोड़ दिए भ्रम

टीवी पर सूर्यग्रहण को दिखाने के लिए एक स्क्रीन पर कई सारे विंडो दिखाए जे रहे हैं...सभी में देश विदेश में होने वाले सूर्यग्रहण को दिखाया जा रहा है...ये भी बताया जा रहा कि ऐसा ग्रहण अब एक हज़ार साल बाद ही देखने को मिलेगा...
(एक छोटा सा परिवार अपने दो छोटे बच्चों के साथ टीवी देख रहा है...छोटा बच्चा जो कि 12-13 साल का है...अपने पिता से पूछता है...इस एपिसोड में पिता और बेटे ही एंकर की भूमिका में होंगे...)

बेटा-पापा एक बात तो बताओ...
पिता-हां पूछो...
बेटा-पापा ये जो सोलर एक्लिप्स है...जिसे सूर्यग्रहण भी कहते हैं- ये हमारी अर्थ और
सूरज के बीच चांद के आने से होता है...ये तो हमें पता है...इसलिए हमारे लिए ये आम
बात है और एस्ट्रॉनोमी के लिए भी एक आम बात ही है...मगर जब लोगों को ये पता
नहीं होगा कि धरती सूरज के चक्कर लगाती है और चांद धरती के...तब क्या आदमी
इस तरह के ग्रहण से डरता नहीं होगा ?
पिता-क्या बात है बेटा, मुझे तो लगता था कि तुम हमेशा कार्टून में ही मस्त रहते हो...
मां-तुम्हें तो मेरा बेटा बस यूं ही लगता है, मेर…
HI all, I am back now