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डिप्टी नज़ीर अहमद-जिन्होंने दिया ‘इंडियन पेनल कोड’ नाम ताज़िरात-ए-हिंद

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हिंदुस्तान ने जिन्हें भुला दिया डिप्टी नज़ीर अहमदनेदियाथा इंडियनपेनलकोडनाम 

ताज़िरात-ए-हिंद पुरानी हिन्दी फिल्मों में आपने अक्सर जज को सज़ा सुनाते वक्त ताज़िरात-ए-हिंद  शब्द का इस्तेमाल करते हुए ज़रूर सुना होगा, लेकिन शायद ही आप इस शब्द का इज़ाद करने वाले का नाम जानते होंगे, तो चलिए आज आपको इसकी की जानकारी दी जाए... जिस प्रकार हिन्दी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का नाम है, ठीक वैसे ही नाम डिप्टी नज़ीर अहमद का उर्दू साहित्य में है, चांदनी चौक की गलियों में रहकर डिप्टी नज़ीर अहमद साहब ने न जाने कितना बड़ा साहित्य रच डाला, कि आज रिसर्च करने वाले स्टुडेंट्स उस स हित्य को पता नहीं कहां-कहां से ढूंढ कर ला रहे हैं, फिर भी जितना काम नज़ीर साहब पर होना चाहिए, उतना हुआ नहीं हैं... हालांकि मास कम्युनिकेशन का विद्यार्थी होने से पहले 2 साल तक मैं भी साहित्य का विद्यार्थी रहा हूं, लेकिन दुर्भाग्य से मुझे भी डिप्टी नज़ीर अहमद के बारे में जानकारी नहीं थी... मेरे एक बहुत ही अजीज़ दोस्त हैं- चंद्रशेखर मल्होत्रा (जिन्हें हम प्यार से शेखर भाई कहते हैं) शेखर भाई चांदनी चौक में अपना व्यवसाय करते हैं, 10 साल पहले…

शेखर का का संवाद- दोस्ती की सिल्वर जुबली

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अबकी बार...

शेखर का का संवाद

(अबकी बार का ये लेख हमारे शेखर भाई ने लिखा है, शेखर भाई हमारे ग्रुप में सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए उनका अनुभव भी हम सभी से ज्यादा है...लीजिए दोस्ती के 25वें साल में एक और अहम कड़ी )
25 साल का समय...कहने को केवल चार शब्द हैं, लेकिन अपने आपमें पूरा इतिहास समेटे हुए है, यदि कोई राजा या राजनीति का बख़ान होता तो इसे शब्दों में समेटना आसान होता, किंतु दोस्ती के सालों को लिखना उतना आसान भी नहीं है, बीते  सालों में सब कुछ बदल गया, जिन घरों में लैंडलाइन फोन नहीं था, वहां सभी के पास अपना मोबाइल है...
नाम का जिक्र न करते हुए बताता हूं कि हमारा एक दोस्त स्कूल की फीस लेकर घर से चला, जो मात्र 50 
पैसे थीवो अठ्न्नी भी रास्ते में कहीं गिर गई, इसके बाद उस दोस्त का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, किसी तरह वो 50 पैसे मिले, तो उसका रोना बंद हुआ, आज वो मित्र हज़ारों रुपये एक मिनट में ख़र्च करने का ताक़त रखता है, किसी के पास बाइक थी तो पेट्रोल के पैसे नहीं होते थे, दोस्तों से लेता था, आज घर में दो-दो लक्जरी कारें हैं, किसी के पास अपना घर नहीं था तो आज उसके पास कई-कई प्रॉपर्टियां हैं...
कई मित्र…